पहाड़ दरकेंगे, नदिया उफनेंगी, बादल फटेंगे…यह चेतावनियां तो थीं सामने, लेकिन कोई सुने-समझे तो!
हमारे पुरखे जानते थे कि गांव कहां बसाना है। वे नदियों के किनारे खेती करते थे। गांव ऊपर पहाड़ पर बसाते थे। ठोस और मजबूत चट्टानों पर पुराने गांव बसे हुए हैं। अब पर्यटन प्रदेश बनाया जा रहा है। ऊर्जा प्रदेश बनाना है। नदियों के किनारे, बल्कि ऐन नदी के डूब क्षेत्र में ‘रिवर व्यू’…
