RBI: भारतीय कंपनियों की बढ़ेगी अधिग्रहण की ताकत, बैंक ज्यादा देंगे कर्ज, आरबीआई ने जारी किया सर्कुलर

RBI: भारतीय कंपनियों की बढ़ेगी अधिग्रहण की ताकत, बैंक ज्यादा देंगे कर्ज, आरबीआई ने जारी किया सर्कुलर


भारतीय कंपनियों की अब घरेलू और विदेशी फर्मों में पूरा या बहुमत हिस्सेदारी खरीदने की ताकत बढ़ेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को इस तरह के अधिग्रहण के लिए दिए जाने वाले कर्ज की सीमा बढ़ाने का सर्कुलर जारी किया है। यह नया नियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। यह ऋण कम अवधि के वित्तीय पुनर्गठन के बजाय लंबी अवधि में मूल्य बनाने वाले रणनीतिक निवेश का हिस्सा होगा।

हालांकि, आरबीआई ने अधिग्रहण करने वाली कंपनियों को लेकर यह भी स्पष्ट किया है कि यह कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध होनी चाहिए।इनकी नेटवर्थ भी अच्छी होनी चाहिए। ज्यादा कर्ज देने के लिए बैंक इन कंपनियों के पिछले तीन वर्ष का मुनाफे का रिकॉर्ड भी ध्यान में रखेंगे।

रिजर्व बैंक के मसौदे के अनुसार, अधिग्रहण मूल्य का अधिकतम 70 प्रतिशत रकम बैंक दे सकता है। कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा अधिग्रहण करने वाली कंपनी को अपने धन का इस्तेमाल कर इक्विटी के रूप में फंड करना होगा। आरबीआई ने इस तरह के अधिग्रहण में किसी बैंक के कुल निवेश को उसके टियर-1 पूंजी के 10 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव दिया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि बैंक सीधे अधिग्रहण करने वाली कंपनी को ही लोन दे सकते हैं। 

नीतियों में सभी तरह की शर्तें होंगी मौजूद

इस तरह की नीति में उधार लेने वालों की योग्यता, सिक्योरिटी, जोखिम प्रबंधन, मार्जिन और निगरानी नियमों की सीमा और शर्तों की जानकारी मौजूद होनी चाहिए। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत होगी कि अधिग्रहण करने वाली कंपनी और बनाई गई एसपीवी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड जैसे वित्तीय बिचौलिये न हों। बैंकों को यह भी सत्यापित करने की जरूरत होगी कि अधिग्रहण करने वाली कंपनी और जिसका अधिग्रहण हो रहा हो, वह आपस में संबंधित न हों। खरीदी जाने वाली कंपनी का मूल्य बाजार नियामक सेबी के नियमों के तहत तय होगा।

 

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