ऊर्जा में अपनी सत्ता होने के मायने: भारत अब अपनी तेल खपत का मात्र 13 प्रतिशत ही उत्पादन करता है!

ऊर्जा में अपनी सत्ता होने के मायने: भारत अब अपनी तेल खपत का मात्र 13 प्रतिशत ही उत्पादन करता है!

नेहरू और मालवीय पर इस विरोध का कोई असर नहीं पड़ा। वह एक नव-स्वतंत्र, अविकसित राष्ट्र का नेतृत्व करते हुए अपनी बात पर दृढ़ संकल्पित रहे। जिसका नतीजा 1956 में स्थापित तेल और प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) के रूप में सामने आया। तीन वर्षों के भीतर, भारत ने अपने पहले बैच के सौ भूवैज्ञानिकों और…

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राम पुनियानी का लेखः RSS, सांप्रदायिक राजनीति और घटती धार्मिक स्वतंत्रता, अमेरिकी संस्था की आंख खोलने वाली रपट

राम पुनियानी का लेखः RSS, सांप्रदायिक राजनीति और घटती धार्मिक स्वतंत्रता, अमेरिकी संस्था की आंख खोलने वाली रपट

यूएससीआईआरएफ ने सख्त कदम उठाए जाने को जरूरी बताया है। आरएसएस के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है यह अहसास सबसे पहले जिसे हुआ और जिसने ऐसा किया भी, वे थे भारत के पहले गृहमंत्री और उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल। आरएसएस पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए गृह मंत्रालय की एक विज्ञप्ति में कहा गया…

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नवीन निश्चलः ‘एक्टिंग’ के गोल्ड मेडलिस्ट, रातों-रात बने बॉलीवुड के स्टार

नवीन निश्चलः ‘एक्टिंग’ के गोल्ड मेडलिस्ट, रातों-रात बने बॉलीवुड के स्टार

नवीन निश्चल की पहली फिल्म सावन भादो (1970) थी, जिसमें उनके साथ रेखा थीं। यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई और वह रातों-रात स्टार बन गए। इसके बाद उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया, जैसे ‘विक्टोरिया नंबर 203’, बुड्ढा मिल गया, धुंध, हंसते जख्म और परवाना। i 1970 के दशक में हिंदी सिनेमा में कई…

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ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए सम्मान

ममता कालिया को साहित्य अकादमी पुरस्कार, ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए सम्मान

इसी प्रकार मैथिली में ‘धात्री पात सन गाम’ (संस्मरण) के लिए महेन्द्र को, मलयालम में मायामानुष्यर (उपन्यास) के लिए एन. प्रभाकरन को, मणिपुरी में ‘कंगलमद्रीब इफुत’ (कहानी) के लिए हाओबम नलिनि को, मराठी में ‘कालयानियया रेषा’ (आत्मकथा) के लिए राजू बाविस्कर, नेपाली में ‘नेपाली पारम्परिक संस्कृति र सभ्यताको ढुकुटी’ (निबंध) के लिए प्रकाश भट्टराई, ओड़िआ…

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आकार पटेल / अवसरवाद की राह पर भटकती सिद्धांतविहीन भारत की विदेश नीति

आकार पटेल / अवसरवाद की राह पर भटकती सिद्धांतविहीन भारत की विदेश नीति

उनका मानना है कि यदि इस नीति को लंबे समय तक अपनाया गया, तो अंततः इसका कोई न कोई नाम अपने-आप सामने आ जाएगा, क्योंकि चुनौती का एक कारण यह भी है कि हम अभी एक बड़े परिवर्तन के शुरुआती चरण में ही हैं। यह कुछ समय पहले, इस सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान…

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इंटरव्यू: वीरान खंडहर प्रतीत हो रहे उर्दू विभाग में नई जान फूंकने वाले युवा शिक्षक आफ़ताब अहमद मनेरी

इंटरव्यू: वीरान खंडहर प्रतीत हो रहे उर्दू विभाग में नई जान फूंकने वाले युवा शिक्षक आफ़ताब अहमद मनेरी

कौन हैं आफ़ताब अहमद मनेरी आफ़ताब अहमद मनेरी का जन्म बिहार के ऐतिहासिक शहर मनेर शरीफ़ में 16 जून 1986 को हुआ। उनके पिता का नाम मोहम्मद मुकीमुद्दीन मनेरी और माता का नाम जुबैदा खातून है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ‘मदरसा इस्लामिया’, मनेर शरीफ़, पटना से और सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी शिक्षा मनेर शरीफ़ में ही…

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न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की चर्चा रोकने की हड़बड़ी क्यों?

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की चर्चा रोकने की हड़बड़ी क्यों?

मजे की बात यह है कि इस हिस्से में ऐसा कुछ भी नहीं है जो विवादास्पद हो। मैं न इस किताब से जुड़ा हूं, न ही एनसीईआरटी की इन नई किताबों का मुरीद हूं। लेकिन कम-से-कम इस हिस्से में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है, पूरी न्यायपालिका को भ्रष्ट बताने या फिर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के…

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पीरियड लीव को अवसर छीनने का नहीं, अधिकार देने का बहाना बनायें

पीरियड लीव को अवसर छीनने का नहीं, अधिकार देने का बहाना बनायें

22 दिसम्बर 2022 की इंडिया टुडे की खबर के अनुसार जोमेटो, स्विगी, ओरियंट इलेक्ट्रिक जैसी कई कंपनियां अपने यहां वेतन के साथ पीरियड लीव दे रही हैं। तब फिर ऐसे में बड़ा सवाल है कि जिस भारत देश के सबसे पिछड़े माने जाने वाले राज्य बिहार ने इस मामले में लगभग साढ़े तीन दशक पहले…

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विष्णु नागर का व्यंग्यः ‘नरेन्दर भी गायब, सिलेंडर भी गायब’ का नारा बेकार, वह गायब था, गायब है, गायब ही रहेगा!

विष्णु नागर का व्यंग्यः ‘नरेन्दर भी गायब, सिलेंडर भी गायब’ का नारा बेकार, वह गायब था, गायब है, गायब ही रहेगा!

वह मुकेश अंबानी को अमेरिका की सबसे बड़ी आइल रिफाइनरी में जबरदस्त निवेश के लिए बधाई दे रहा होगा। ट्रंप ने अंबानी को इसकी बधाई दी है, इस खुशी में नाच-गा रहा होगा! वह अडानी को आश्वासन दे रहा होगा कि तू इतना घबराता क्यों है, ट्रंप से पहले‌ मैं अपनी फाइल सेट करवाऊंगा और फिर तेरा…

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तेजी से बढ़ता तापमान अब ‘न्यू नॉर्मल’ है, सरकार विकास के नाम पर सब बर्बाद करने पर आमादा

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वर्ष 2025 में एक अध्ययन में बताया गया था कि दुनिया में घनी आबादी वाले राजधानी शहरों में अत्यधिक तापमान वाले दिनों की संख्या 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है। इस अध्ययन को नई दिल्ली समेत दुनिया के 43 सघन आबादी वाले राजधानी शहरों में किया गया है। रोम और बीजिंग जैसे शहरों में…

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